International Nurses Day : नन्ही जान को बचाने में डॉक्टर्स के साथ नाहटा अस्पताल के ये नर्सेज भी बने देवदूत, जानिए इनके हौंसले की कहानी

International Nurses Day : नन्ही जान को बचाने में डॉक्टर्स के साथ नाहटा अस्पताल के ये नर्सेज भी बने देवदूत, जानिए इनके हौंसले की कहानी
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संवाददाता – योगेश सोनी

आज इंटरनेशनल नर्स दिवस है जैसा कि आपको पता है कि कोविड के समय में नर्सेज ने 24 घंटे तन मन के साथ अपनी ड्यूटी निभाकर अपना फर्ज अदा किया था। ऐसे ही नर्सिंग स्टाफ को आज इस दिवस पर हम सभी को सेल्यूट करना चाहिए। राजकीय अस्पताल में विभिन्न वार्डों में लगे नर्सिंग कर्मी आज भी बखूबी अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। आज हम बात करेंगे बाड़मेर के राजकीय नाहटा अस्पताल में बने विशेष नवजात चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) वार्ड कि जो कि डिलीवरी के लिए और डिलीवरी के बाद गंभीर नवजात के लिए वरदान साबित हो रही है। हालांकि डॉक्टर की ओर से नवजात का उपचार किया जाता है लेकिन नवजात शिशु की वार्ड में 24 घंटे केयर इन्हीं नर्सिंग कर्मियों द्वारा की जाती है।

राजकीय अस्पताल में बने एसएनसीयू वार्ड में रोजाना 20 नवजात भर्ती होते हैं जिनकी डिलीवरी के बाद हालत नाजुक होती है फिर भी यहां के स्टाफ पूरे मन के साथ नवजात की केयर कर उनको स्वास्थ्य बेहतर बनाने के पुरे प्रयास करते है। जब नवजात के परिवार की सारी उम्मीदें टूट जाती है तो एक किरण बनकर यह नर्सिंग कर्मी नवजात शिशु के जीवन को बचाने में कामयाब हो जाते हैं। इनकी सेवाएं वाकई काबिले तारीफ है।

वार्ड इंचार्ज की मेहनत से हुआ कायाकल्प

नाहटा अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड यूनिट को राजस्थान में बेहतरीन सेवाओं के लिए सम्मानित किया जा चुका है। दरअसल एसएससी वार्ड इंचार्ज गोपाल सिंह की मेहनत से यहां पर काफी विकास कार्य हुए है। ड्यूटी निभाने के साथ ही गोपाल सिंह भामाशाह को प्रेरित कर वार्ड में हर संभव विकास के लिए प्रयास करते हैं। इन्होंने वार्ड की सूरत तक बदल दी है। अभी तक इन्होंने भामाशाह से लाखों रुपए डोनेशन करवा कर वार्ड को बेहतर बनाने के लिए काफी कार्य करवाएं और कभी जरूरत पड़ी तो जेब से भी खर्च कर वार्ड का मेंटेनेस किया है।

आपको बता दें एसएनसीयू वार्ड में वर्तमान में छह नर्सिंगकर्मी की ड्यूटी है वो भी सभी मेल नर्स है। वार्ड के इंचार्ज गोपालसिंह के अलावा नर्स भैराराम देवासी, किस्तुराराम, थानाराम, अशोक कुमार, ज्ञान प्रकाश ड्यूटी पर रहते हैं। गोपालसिंह बताते हैं कि तीन शिफ्टों में कार्मिकों की यहां ड्यूटी रहती है जो सुबह 8 से दोपहर 2, दोपहर 2 से रात 8 और रात 8 से सुबह 8 बजे तक रहती है। पहले यहां पर 12 लोगो का स्टाफ था लेकिन अब छह लोगो का ही स्टाफ रह गया है फिर भी स्टाफ मेहनत के साथ अपनी ड्यूटी करते हैं।