वनवास के समय पांडवों ने इस मंदिर में आकर की थी भगवान शिव की पूजा, अब यहां उमड़ती है भक्तों की भीड़

वनवास के समय पांडवों ने इस मंदिर में आकर की थी भगवान शिव की पूजा, अब यहां उमड़ती है भक्तों की भीड़
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Khabarexpo: भगवान शिव को पहाड़ों में वास करने वाले देवता के रुप में पुजा जाता है। देश-प्रदेश के पहाड़ों में शिव के उपासक सदियों से उनकी पूजा अर्चना और दर्शन करते आए हैं। मालाणी की छप्पन की पहाड़ियों में भी ऐसे ही कुछ साक्ष्य देखने को मिलते हैं। बाड़मेर के किटनोद गांव की पहाड़ियों में बने बागालेश्वर महादेव मंदिर की भी अपनी एक अलग कहानी है.

बाड़मेर के बालोतरा कस्बे से कुछ किलोमीटर दूर किटनोद-कुशीप की पहाड़ियों में एक शिव मंदिर स्थित है, यहां सावन के महीने में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ती है। किटनोद कस्बे से महज 4 किलोमीटर दूर छप्पन की पहाड़ियों के बीच बागालेश्वर महादेव मंदिर की अपनी एक अलग कहानी है।

पहाड़ी के बीच बने इस मंदिर के बारे में ये कहा जाता है कि जब पांडव वनवास के दौरान इस क्षेत्र से गुजरे थे तो वो कुछ महीने इन छप्पन की पहाड़ियों में भी रुके थे। इस दौरान उन्होंने यहां शिव की उपासना की थी और शिवलिंग की स्थापना की। पांडवों ने इस स्थान पर एक बेरी भी खोदी थी, जिसे आज पाण्डु बेरी (कुआं) के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि इस बेरी में पानी कभी कम नहीं होता।

शिवलिंग की पूजा अर्चना कर लोग खुशहाली की कामना 

अज्ञातवास के दौरान भगवान कृष्ण पाण्डवों से मिलने इन्ही पहाड़ों में आये थे। तभी से यहां भगवान शिव की पूजा की जाती है। सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यहां स्थापित शिवलिंग की पूजा अर्चना कर लोग खुशहाली की कामना करते हैं।