Nag Panchami Katha: नाग पंचमी से जुड़ी ये रोचक बाते आपने कभी नहीं सुनी होगी? जानिए इसकी पौराणिक कथा

Nag Panchami Katha: नाग पंचमी से जुड़ी ये रोचक बाते आपने कभी नहीं सुनी होगी? जानिए इसकी पौराणिक कथा
-5264283304557104" crossorigin="anonymous">

Nag Panchami 2022: हिंदू पंचांग के अनुसार सावन महीने के शु्क्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। यह दिन नाग देवता की पूजा को समर्पित माना जाता है। कहा जाता है कि नाग पंचमी के पर्व पर नाग देवता की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। प्राचीन काल से सर्प देवताओं के पूजन की परंपरा चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि नाग की पूजा करने से सांपों के कारण होने वाला किसी भी प्रकार का भय खत्म हो जाता है। ज्योतिषों के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवताओं की आराधना करने से जातकों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस बार 2 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है।

नाग पंचमी की पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार जनमेजय अर्जुन के पौत्र राजा परीक्षित के पुत्र थे। जब जनमेजय ने अपनी पिता की मृत्यु का कारण सर्पदंश जाना तो उसने बदला लेने की मंशा से सर्पसत्र नामक यज्ञ का आयोजन किया। नागों की रक्षा के लिए यज्ञ को ऋषि आस्तिक मुनि ने श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन रोक दिया और नागों की रक्षा की। इस दौरान तक्षक नाग के बचने से नागों का वंश बच गया। आग के ताप से नागों को बचाने के लिए ऋषि ने उनपर कच्चा दूध डाल दिया था। तभी से नागपंचमी का पर्व मनाया जाने लगा। साथ ही नाग देवता को दूध चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

नाग पंचमी के दिन इन देवों का करें स्मरण

नाग पंचमी के दिन कुछ नाग देवों का स्मरण कर उनकी पूजा की जाती है। उन नामों में अनंत, वासुकी, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट, शंख, कालिया और पिंगल प्रमुख हैं। इस दिन घर के दरवाजे पर सांप की 8 आकृतियां भी बनाई जाती है। साथ ही हल्दी, रोली, अक्षत और पुष्प चढ़ाकर सर्प देवता की पूजा की जाती है। इस दौरान कच्छे दूध में घी और शक्कर मिलाकर नाग देव का स्मरण कर उन्हें अर्पित करने की परंपरा है।