स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा से इस्तीफे देने की अंदरूनी कहानी, जानिए पूरा सच

स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा से इस्तीफे देने की अंदरूनी कहानी, जानिए पूरा सच
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khabarexpo : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले योगी सरकार में मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से बीजेपी खफा है। इस्तीफे के बाद मौर्य समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के साथ खड़े होने की तस्वीर ने बीजेपी की चिंता और बढ़ा दी है।

आपको बता दें कि डैमेज कंट्रोल के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक मंथन चल रहा है। इस बीच स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा से इस्तीफे की अंदरूनी कहानी सामने आई है।

क्या है इस्तीफे की अंदरूनी कहानी?

भाजपा सूत्रों के अनुसार स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा से जाने के पीछे की अंदरूनी कहानी यह है कि स्वामी प्रसाद मौर्य चाहते थे कि 2017 में उनके साथ आए सभी विधायकों के टिकटों को दोहराया जाए। इसके साथ ही वह दो अन्य नामों का प्रचार कर रहे थे जिन्हें उन्हें करना चाहिए। टिकट भी दिया जाए। जिसे बीजेपी ने मानने से इनकार कर दिया, क्योंकि कई ऐसे विधायक हैं, जो सर्वे में चुनाव हार रहे थे।

ऐसे में बीजेपी ने टिकट देने से इनकार कर दिया था। इसके अलावा उनके एक समर्थक के खिलाफ भी कुछ मामले थे, जिन्हें वह खत्म करना चाहते थे। लेकिन आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले वह इसे खत्म नहीं कर सके और उन्हें आश्वासन दिया गया कि यह चुनाव के बाद किया जाएगा। पिछले एक सप्ताह से स्वामी प्रसाद मौर्य और भाजपा नेताओं के बीच लगातार बातचीत चल रही थी, लेकिन मौर्य नहीं माने।

बता दें कि मौर्य के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने अब डैमेज कंट्रोल की कोशिश शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वामी प्रसाद मौर्य को मनाने का जिम्मा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को सौंपा है। केशव प्रसाद मौर्य अन्य असंतुष्ट विधायकों को भी इस्तीफा देने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं। इतना ही नहीं यूपी बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और संगठन महासचिव सुनील बंसल भी इस काम में लगे हुए हैं। आज मंत्री दारा सिंह चौहान को दिल्ली बुलाया गया है। सूत्रों के मुताबिक उनकी शीर्ष नेताओं से बातचीत हो सकती है।

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