MNIT जयपुर में महामना मालवीय जी के जीवन सिद्धान्तों पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन

MNIT जयपुर में महामना मालवीय जी के जीवन सिद्धान्तों पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन
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पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती के उपलक्ष में आज पौष कृष्ण अष्टमी, 27 दिसंबर 2021 को मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मालवीय जी के पौत्र न्यायमूर्ति एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गिरिधर मालवीय विशिष्ट अतिथि रहे।

भारत अध्यन केंद्र BHU वाराणसी के अध्यक्ष प्रोफेसर राकेश उपाध्यय व मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. राकेश ने महामना के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान पर बात करते हुए बताया कि कैसे गरीबी तथा अत्यंत विपन्नता में जन्मे महामना मालवीय जी ने न केवल एक वकील, एक पत्रकार, एक राजनीतिज्ञ के रूप में बल्कि 3 बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहते हुए शिक्षा शास्त्री के नाते भारत को नई ऊँचाईयां व दिशा दी।

प्रो. राकेश ने महामना के वास्तविक रूप का चित्रण करते हुए बताया कि कैसे ईस्वर भक्ति के साथ वे नैतिक मूल्यों, समाजिक समरसता व देश कि अखंडता के लिए मजबूती से खड़े रहे। जलियांवाला बाग कांड के बाद मालवीय जी ने अमृतसर के गांव गांव शहर शहर जा कर लोगों को न केवल संभाला बल्कि सभी को न्याय दिलाने के लिए संकल्पित किया। राकेश उपाध्याय ने बताया कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थापना का लक्ष्य संस्कृति की रक्षा के साथ ही भारतीय युवाओं को दिशा देना व समरसता का भाव बढ़ाना था।


न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने महामना को एक स्वत्रंत्रता सेनानी तथा एक शिक्षाविद के रूप में याद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. प्रभा शंकर शुक्ल (कुलपति केंद्रीय विश्वविद्यालय शिलांग) ने महामना को राष्ट्रीय शिक्षा नीती का जनक बताया।अतिथियों के स्वागत उद्बोधन में संस्थान के निदेशक प्रो अजय पाल सिंह राठौड़ ने महामना के जीवन को याद किया।

कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राजकुमार व्यास ने किया तो वहीं संगोष्ठी का संचालन डॉ ऋषि तिवारी ने किया। संगोष्ठी के सह संयोजक वीरेंद्र पांडेय ने सभी आगंतुकों को कार्यक्रम कि विस्तृत रूप रेखा से अवगत कराया।

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