Rooftop Farming : भारत में बढ़ रहा घरों की छत पर खेती करने का शौक, जाने किस तरह से आप भी कर सकते है अपने घर में ही खेती

Rooftop Farming : भारत में बढ़ रहा घरों की छत पर खेती करने का शौक, जाने किस तरह से आप भी कर सकते है अपने घर में ही खेती
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आम तौर पर ताजी सब्जियों के शौकीन लोग मंडियों से सुबह खरीदारी करते हुए देखे जाते हैं। इसके अलावा काफी सारे लोग अपने घरों में मौजूद छोटे प्लॉट पर भी फल और सब्जियां उगाते है। अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों में पॉपुलर रूफ टॉप फार्मिंग का कल्चर अब भारत में भी काफी लोकप्रिय हो रहा है। आपको बता दें कि शहरी इलाके में बना दुनिया का सबसे बड़ा रूफ टॉप फार्म फ्रांस की राजधानी पेरिस में मौजुद है। किचन गार्डन बनाने या रूफ टॉप फार्मिंग शहरी क्षेत्रों में कई घरों में देखी जा सकती है। ऐसी ही एक छत है ओडिशा के मयूरभंज जिले में। यहां एक बिजनेसमैन ने अपने घर की छत पर पौधों की 40 वैराइटी उगाईं हैं। इनमें मेडिसिनल प्लांट भी शामिल हैं।

सुबह पौधों की देखभाल, शाम में बिजनेस

ओडिशा के रहने वाले व्यवसायी धरणी कुमार डे की गिनती उन लोगों में होती है, जिन्होंने सब्जियों, फलों और फूलों की खेती करने के लिए अपनी ही छत का इस्तेमाल करना शुरु किया। धरणी बताते हैं कि घर की छत पर मौजूद फल-सब्जी की वेराइटी के कारण उन्हें बाजार से खरीदारी करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। पूरे साल अपने छत के बगीचे से ही उन्हें सब कुछ मिलता रहता है। व्यवसायी होने के नाते, धरणी रोज सुबह पौधों की देखभाल करते हैं। और शाम को अपना बिजनेस संभालते है।

घर की छत पर उगाया नारियल

किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले धरणी की बचपन से ही पौधों और खेती में रुचि थी। उन्होंने पिछले 12 साल से अपने घर की छत पर किचन गार्डन बना रखा है। उनके छत के बगीचे में औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों, फूलों, पेड़ों और सब्जियों सहित लगभग 40 प्रकार के पौधे लगा रखे हैं। जिनमें फलों से भरा 4 से 5 फीट लंबा नारियल का पेड़ सभी को आकर्षित करता है। उन्होंने बताया, 2010 में छत पर खेती शुरू करते समय शुरुआत में उन्होंने सिर्फ फूलों के पौधे लगाए थे। फिर अन्य फलों और सब्जियों को उगाना शुरु किया। उनके रूफटॉप फार्म में कई प्रकार के पौधे हैं। इनमें मेडिसिनल प्लांट भी हैं।

खेती के लिए किया इन चीजों का प्रयोग

बिजनेसमैन धरणी कुमार डे रूफ टॉप फार्म में आलू, प्याज, लहसुन, करेला, बैंगन, लौकी, टमाटर, मूली और हरा धनिये की पैदावार करते हैं। उन्होंने छत पर खेती के दौरान आम, नींबू, पपीता, चीकू और बेर के पौधे भी सफलतापूर्वक उगाए हैं। उन्होंने छत पर पौधे उगाने के लिए फेंकी हुई प्लास्टिक की बाल्टी, प्लास्टिक और टूटी हुई पानी की टंकियों का इस्तेमाल किया है। दिलचस्प बात ते यह है कि धरणी अपने छत के बगीचे में कभी भी रासायनिक उर्वरकों या कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते है।