भारत का एक ऐसा मंदिर जहां नवरात्रि में माता को किसी जानवर की नहीं बल्कि इस चीज की चढ़ाई जाती है बलि....

भारत का एक ऐसा मंदिर जहां नवरात्रि में माता को किसी जानवर की नहीं बल्कि इस चीज की चढ़ाई जाती है बलि....
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Khabarexpo: प्राचीन समय में नवरात्रि के दिनों में मंदिरों में बलि देने की परम्परा थी। आज भी हमारे देश में कुछ जगह ऐसी है जहां ये परंपराएं अभी भी जिंदा है। भारत में बलि प्रथा पर प्रतिबंध होने के बाद भी बलि देने की परंपरा अब भी सामने आती है। प्रतापगढ़ जिले के अरनोद उपखंड मुख्यालय के अचनारा के खेड़ी चामुंडा माता मंदिर में बलि देने की अनोखी प्रथा का आज भी निर्वहन किया जाता है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि बिना किसी जीव हत्या के यहां अनोखे तरीके से बली देने की परंपरा को जिंदा रखा गया है।

आपको बता दें नवरात्रि के अंतिम दिन कल चामुंडा माता मंदिर में अचनारा के भक्तों ने लंबी कतारों में लगकर देवी के दर्शन किए। इसके साथ हीं, फूल, मालाओं, धूप-दीप नैवेद्य से भक्तों ने सामूहिक रूप से माता की पूजा अर्चना की। मंत्र उच्चारण आरती के साथ घंटा ध्वनि से सारे दिन मंदिर परिसर गूंजते रहे।

मंदिरों के आसपास बाजारों में भी लोगों की खासी भीड़ लगी रही। वैसे तो माता कुष्मांडा को कद्दू की बलि चढ़ाई जाती है, लेकिन चामुंडा माता मंदिर अचनारा में जीव हत्या नहीं करने के संदेश के साथ बकरे की जगह नवरात्रि के अंतिम दिन कद्दू की बलि देकर माता को रिक्षाया जाता है।

इस दौरान बड़ी तादाद में यहां भक्तों की भीड़ जमा होती है। बलि देने से पहले भक्तगण ने माता के जयकारों के साथ भक्ति भजन और ढोल की थाप पर नृत्य कर माता को प्रसन्न किया जाता है। वहीं, पूजा अनुष्ठान और यज्ञ हवन के बाद माता की चौकी की स्थापना की जाती है।

वैसे तो प्राचीन काल से यहां बकरे की बलि देने की प्रथा है, लेकिन जीव हत्या को रोकने की मुहिम के चलते यहां पर माता को कद्दू की बलि चढाई जाती है। अनुष्ठान पूजा और बलि की प्रथा के बाद महा प्रसादी का आयोजन भी किया जाता है।  इसमें जिले भर के श्रद्धालु भी भाग लेते हैं। चामुंडा माता का मंदिर जिले का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां पर माता को कद्दू की बलि चढ़ाई जाती है।