प्रतापगढ़ के इस मंदिर की है खास मान्यता, यहां दिया जाता है पाप-पुण्य का सर्टिफिकेट

प्रतापगढ़ के इस मंदिर की है खास मान्यता, यहां दिया जाता है पाप-पुण्य का सर्टिफिकेट
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प्रतापगढ़ जिले के गोतमेश्वर महादेव का मंदिर अपनी तीन ख़ास मान्यताओं के चलते विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखता है। दरअसल यह वह स्थान है जहां गौतमऋषि को अपने गो हत्या के पापों से मुक्ति मिली थी। जिसके बाद से यहां सदियों से स्थित मंदाकनी कुंड में डुबकी लगाने की परम्परा शुरु हो गई। 

अपने किए पापों से मुक्ति पाने के लिए लोग दूर-दराज से इस मंदिर में दर्शन के लिए आते है। यहां के पुजारी द्वारा पाप मुक्ति का सर्टिफिकेट भी दिया जाता है। इस मंदिर की एक ख़ास मान्यता यह भी है कि यहां स्थित मंदाकनी कुंड में यदि कोई नि:संतान दम्पति स्नान करती है तो सालों से पुत्र प्राप्ति नहीं होने वाले व्यक्ति को भी संतान की प्राप्ति हो जाती है।

गौतमेश्वर महावेद मंदिर विश्वभर में इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि यह विश्व का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है।आपको बता दें कि हिन्दू धर्म शास्त्रों में खंडित देव प्रतिमाओं, खंडित शिवलिंगों और तस्वीरों के पूजन को शुभ नहीं माना जाता है। लेकिन जिले का गौतमेश्वर एक ऐसा शिवालय है जहां पर गौतमेश्वर महादेव दो भागों में विभाजित हैं। पूरी तरह से खंडित शिवलिंग होने के बाद भी यहां की शिवलिंग पूजनीय है।

यहां स्थित मोक्षदायिनी कुंड में स्नान करने के बाद उस व्यक्ति को मंदिर का पुजारी पाप मुक्ति का प्रमाण पत्र देता है। कहा जाता है कि सप्तऋषियों में से एक गौतम ऋषि पर लगा गौहत्या का कलंक भी यहीं स्नान करने के बाद मिटा था। कहा जाता है कि मोहम्मद गजनवी जब मंदिरों पर आक्रमण करते हुए यहां पहुंचा था तब उसने गौतमेश्वर महादेव शिवलिंग को भी खंडित करने का प्रयास किया। जब उसने शिवलिंग पर प्रहार किया तब पहले तो शिवलिंग से दूध की धार निकली। दूसरे प्रहार में उसमें से दही की धारा निकली।

जब गजनवी ने तीसरा प्रहार किया तो शिवलिंग से आंधी की तरह मधुमक्खियों का झुंड निकला, जिसने गजनवी सहित उसकी सेना पर हमला बोल दिया था। जिसके बाद गजनवी ने शिवलिंग के सामने शीश नवाया मंदिर का पुन: निर्माण करवाया और एक शिलालेख भी लगाया। आज भी ये शिलालेख इस मंदिर में लगा हुआ है।

आदिवासियों के हरिद्वार के नाम से मान्यता प्राप्त इस प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटक स्थल गौतमेश्वर महादेव मंदिर में राजस्थान सहित मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के श्रद्धालु भी दर्शन के लिए आते हैं।